अशोका Lake-View के वेटर की आत्मा क्या होटल में भटक टेबल कर रही है अटेंड??

जनसम्पर्क-life

वेटर जब मर गया तो कस्ट्मर के टेबल अटेंड कैसे कर सकता है??

वेटर धनराज पटेल का क़त्ल हुआ या उसने खुद ही कि खुदकुशी ??

Anam Ibrahim
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भोपाल: मध्यप्रदेश में स्थित पर्यटन की आरामगाहों में हाल ही में शुमार हुई होटल अशोका लेकव्यू जिसे पूर्व में केंद्र के राष्ट्रीय पर्यटन होटल नेटवर्क द्वारा संचालित किया जा रहा था वहां आज वेटर धनराज पटेल की आत्मा टेबल पर ऑडर लेने पहुँची।

भोपाल: आज लम्बे वक़्त के बाद अशोका जाना हुआ तो होटल के सभी जाने पहचाने चेहरे मेरी आँख से रूबरू होते ही इस्तकबाल कर ख़ुशआमदीद की औपचारिकता में रचेबसे नज़र आने लगे। खैर अशोका के पांचवे माले पर मौजूद रेस्टोरेंट की बात हो या नीचे किनारा डाइनिंग हॉल व कॉन्फेंस हॉल के आर-पार देखने की, यहां की हर खिड़कियों के शीशे पर लदे पर्दो को हटाकर मेरी निगाहों ने कई बार बड़ी तवज्जों से बड़ी झील के नज़ारो को झांककर देखा है। बहरहाल इस बार लम्बे वक़्त के बाद जैसे ही मैं अशोका में कॉफ़ी पीने बैठा तो पुरानी आदत अमल में आ गई। मौसम में मौशिकी को देख मैंने बैग से मैकबुक निकाली और ख़बर बनाने लगा तभी अचानक मेरे कानो में जानी पहचानी आवाज़ आई ‘गुड ईवनिंग सर’। आवाज़ की तरफ़ आकर्षित होते ही मैंने अपनी नज़रे उठाई तो दोनों हाथों को पीछे कर वेटर धनराज मुस्कुरा रहा था जिसे देख मैरे लबो से निकला धनराज कैसे हो? जवाब में धनराज उदास हो गया बहरहाल मैंने कहा पूरा रेस्टोरेंट खाली पड़ा है आज तो धनराज एक गरमा गरम कॉफ़ी ले आओ। जिसके बाद धनराज ने कहा सर कॉफ़ी के साथ पकौड़े भी लाना है क्या, मैंने कहा नही। बस फिर क्या था धनराज मेरा ऑडर लेकर चला गया और मैं मैकबुक के कीबोर्ड की बटन दबाते दबाते ख़बर मुक़म्मल करने में मशरूफ़ हो गया। बहुत देर हो गई और कॉफ़ी नही आई तो बड़बड़ाते हुए मैने आवाज़ लगाई अरे कोई भी नही है क्या यहां, इतने में दो वेटर बाहर से आते हुए मेरी तरफ़ बड़े और कहा जी सर, अरे कितनी देर हो गई कॉफ़ी क्या कश्मीर से बनवाकर बुलवा रहे हो। मेरी बातों को सुन दोनों वेटर एक दूसरे की तरफ़ देखने लगे और कहा सर कॉफ़ी अभी लाता हूँ ये कहते हुए वेटर पलटा ही था कि मैने नाराज़ होते हुए कहा आधा घण्टा हो गया धनराज को कॉफी का ऑर्डर करे हुए बस इतना कहना था कि जाता हुआ वेटर थम सा गया और ग्लास में पानी भरता हुआ दूसरा वेटर वही रुक गया दोनों मुझे बड़ी हैरत भरी निगाह से घूरने लगे जिनको देख मुझे बड़ा अजीब सा लगा। सादे मन से मैने दोनों की तरफ़ देख कहा क्या हुआ तुम दोनों चौक क्यों गए? जिसपर वेटर ने कहा सर धनराज पटेल का तो जनवरी में देहांत हो गया, उनकी ये बात सुन मैंने कहा क्या बकवास करते हो रुको GM से शिकायत करूंगा तुम्हारी। अभी तो धनराज मुझसे कॉफी का ऑर्डर लेकर गया है और तुम कह रहे हो कि धनराज का देहांत हो गया। मैं आगे कुछ और कह पाता वेटर ने मेरी बात को काटते हुए कहा सर रेस्टोरेंट में हम दोनों के अलावा और कोई नही है धनराज का देहांत 8 महीने पहले हो चुका है उसकी लाश चेतक ब्रिज के पास पड़ी मिली थी। बस ये सुनते ही मुझे दोनों वेटरों पर गुस्सा आने लगा जिसपर एक वेटर ने दूसरे से कहा राजू सर और संतोष सर को बुलाओ थोड़ी ही देर में होटल का दूसरा स्टाफ भी मेरे टेबल के इर्दगिर्द आ खड़ा हुआ। सब की सब मुझसे एक ही बात कहने लगे सर धनराज को मरे हुए 8 महीने हो गए मरने की वजह कोई आत्महत्या बताने लगा तो कोई मर्डर बताने लगा। सब की बातें सुनते हुए में सुन सा होने लगा मेरे होठ सुख से गए माथे पर ठंडे पसीने की बूंदे उभर आई, मैं मन ही मन खुद से खुद ही सवाल करने लगा अगर वेटर धनराज पटेल मर गया है तो मेरे टेबल पर मुझको अटेंड करने धनराज कैसे आ सकता है? पल भर में हज़ारो सवाल मेरे मन मे उठ गए जिनके जवाब मेरे पास नही थे बस आंखों में धनराज का कुछ देर पहले देखा हुआ मुस्कुराता चेहरा और कानों में उसकी ‘गुड इवनिंग सर’ की आवाज़ मुझे बेचैन करने लगी जिसके बाद में वहां से उठ चल दिया लेकिन अब भी मेरा ज़हन धनराज की रहस्यमाई मौजूदगी और मौत की बात से बाहर नही निकल पाया। खैर में अब जल्द ही धनराज की रहस्यमाई मौत पर का पता लगाने घटना स्थल व थाने के चक्कर लगाने वाला हूँ।

गुत्थी सुलझने पर ख़ुलासे की ख़बर जल्द पढ़े प्रदेश की हक़ीक़त में।

 

 

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