अब तक DIG इरशाद वली ने शहर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में कितना लाया सुधार?!

अनम इब्राहिम
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5 महीनों में DIG द्वारा शहर के सर पर सुरक्षा का साफ़ा बाँध्ने की हरचंद सफ़ल कवायदें की गई जिसके लिए जागरूकता अभियान के ज़रिए गली मौहल्ले व बाज़ारो में अपराधों से बचने व बचाने के मंत्र भी सिखाए गए जो रफ्तारफ्ता रंग भी ला रहे हैं लेकिन नोसिखिया मैदानी बल व नए टीआइयों के चलते तीन बड़ी वारदातें गुज़र गई !!

☆जनसम्पर्क―life☆
(23/6/2019)

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भोपाल की पुलिसिंग में आज DIG इरशाद वली के मुक़म्मल 5 महीने पूरे हुए

जानिए अब तक की कारगुज़ारी….

भोपाल: राजधानी का रिवाज़ रहा है कि जब भी कोई नया IG, DIG स्तर का अफ़सर पहली बार आमद देता है तो वो शुरुआती समय मे शहर का मिजाज़ समझने के लिए शहर को सुरक्षा का लिहाफ़ उड़ाने के लिए बेस्ट पुलिसिंग का परफॉमेंस देने के लिए मैदान में पूर्व से तैनात पुराने मंजे हुए CSP,TI, व बल का सहारा लेता है लेकिन DIG इरशाद वली की कारगुज़ारी कुछ अलग ही है 23 जनवरी को जब इरशाद ने भोपाल अर्बन डीआईजी का चार्ज लिया था तब भोपाल के सभी पुराने CSP के तबादले हो चुके थे और लगभग सभी थानों के पुराने टीआईयों की भी रुकसती हो चुकी थी मैदान में लम्बे सालो से मौज़ूद पुलिसिया बल भी बदल गया था तक़रीबन वो तमाम पुराने वर्दीधारी शहर से कूच कर चुके थे जो शहर के अपराधों व अपराधियों की नब्ज़ को दबाना जानते थे बाकी जो थोड़े बहोत रह गए थे उन्हें DIG वली के दौरान ही चुनाव के चलते इधर से उधर रवानगी लेकर रुख़शती दर्ज़ करानी पड़ी ऐसे नाज़ुक मौक़े पर आज ही से 5 महीने पहले भोपाल पुलिस में अर्बन DIG के चुनोती भरे ओहदे को इरशाद वली ने संभाला था जिसके बाद से वली द्वारा आज दिनांक तक

□ 5 महीने में संगीन मामलों पर 34 प्रेसवार्ता ली गई ..
□ 5 महीने में सफलता,सुविधा,सुरक्षा और जागरूकता के चलते 107 प्रेससविज्ञप्ति रिलीज़ की गई
□ 5 महीने में पूर्व व नए 112 अंधे मामलों के ख़ुलासे किए गए..
□ 5 महीने में कई मौहल्लों में जनता के बीच जा दर्ज़नो जनसंवाद किए गए..
□5 महीने में दर्ज़नो सोशल अवेरनेस प्रोग्राम के ज़रिए कई इलाक़ो में शांति स्थापित करने की सफ़ल क़वायद की गई ….
□ 5 महीने में होटल,रेस्टोरेंट ढाबे,शादी हॉल बैंक,DJ मॉल और सोसायटी समिति व व्यपारियो के साथ सुरक्षा को लेकर दर्ज़नो गम्भीरता से मीटिंग भी की गई ..लेकिन पलपल पनपती इन सैकड़ो सफलताओं के बीच चंद माँ-बाप,परिवार की लापरवाहियों के चलते दो मासूम नाबालिग़ बच्चियों के साथ थाना कमला नगर व कोह-ए-फ़िज़ा इलाक़ों में हैवानियत भरी वारदात गुज़र गई जिसने पूरे समाज को शर्मसार कर दिया ऐसा नही है ये यह वहशियाना वारदात भोपाल में पहली बार घटी है कि 2 नाबालिग़ मासूमों का दो-ढाई महीनों के भीतर अपहरण व ब्लात्कार व हत्या हुई है। बल्कि इस शहर में हर साल मासूमियत से ब्लात्कार के दर्दीले किस्से गुज़रते ही रहते है 2012 में इससे भी भयंकर रूह कपकपाकर रौंगटे खड़े कर देने वाली वारदात थाना टीटी नगर इलाक़े में पूर्व गृहमंत्री के घर के सामने 8साल की काजल धुरिया नामक बच्ची के साथ गुज़री थी जिसको शाम के समय मेले से उठाकर हवस का भेड़िया ले गया था रातभर ब्लात्कार करने के बाद हाथ पैर और सर धड़ से अलग कर बच्ची के टुकड़े टुकड़े कर के गृहमंत्री के घर के पास फेक दिया था 2014 में थाना छोला और निशातपुरा के दरमियां सुबह सुबह पन्नी बीनने वाली ठंड से कुकडती हुई एक मासूम बच्ची को मैजिक चालक ने कचरा घर मे लेजाकर हवस का निवाला बना लिया था फिर बच्ची के ही दुपट्टे से उसका गला दबाकर मार डाला था इस शहर में 2 साल की बच्ची से लेकर 78 वर्ष की बूढ़ी औरत के साथ तक ब्लात्कार हो चुका है दर्ज़नो बार लोग पुलिस कस्तीडी में भी दम तोड़ चुके है अपराध पहले भी होते थे अब भी होते है और आगे भी होते रहेंगे तब तक जबतक समाज के भीतर अपराध से लड़ने के लिए उसका डटकर सामना करने के लिए जागो और जगाओ की मुहिम रंग नही लाती। ऐसी ही सुरक्षा के ऐतबार से जागरूकता के जाम झलकाती मुहिमों को डीआईजी इरशाद वली समाज के सहियोग से धीरेधीरे सफ़लता का अमलीजामा पहना कर वज़ूद में ला रहे है। उनके द्वारा शहर में बाल अपराध रोकने महिला सुरक्षा को मजबूत करने और नशे के माफियाओं पर नकेल कसने के बहोत हद तक सफल प्रयास किए जा रहे है पुलिस द्वारा झुग्गी बस्ती,सोसायटी व स्कूल, कॉलेज, मौहल्लों में क्राइम कंट्रोल करने के लिए आम महफिलें सँजोई जा रही है समाज के हर वर्ग के युवाओं को चाहिए कि वो भी आगे आए साथ दे हाथ दें अपराध से जूझने के लिए पुरजोशी से कंदे से कंदा मिलाए क्योंकि इस बार मैदान में आला तो अफ़सर अनुभवी है लेकिन थाना स्तर पर लगभग 70% पुलिसिया बल नई भर्ती व नोसिखिया है और ज़्यादातर नए टीआई CSP को भी इस शहर की पुलिसिंग व लॉ एंड ऑर्डर समझने में थोड़ा वक़्त लगेगा ऐसे हालातो में डीआईजी की कमान,क़वायद और निगहबानी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है |

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